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हर बुखार सामान्य नहीं! कहीं यह खतरनाक वायरल फ्लू तो नहीं?

 


मानसून का मौसम जहाँ एक ओर गर्मी से राहत देता है, वहीं दूसरी ओर कई संक्रामक बीमारियों को भी अपने साथ लेकर आता है। इन दिनों देश के कई हिस्सों में वायरल बुखार, फ्लू (इन्फ्लुएंजा), सर्दी-जुकाम और गले के संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में रोज़ बड़ी संख्या में मरीज तेज बुखार, खांसी, गले में दर्द और कमजोरी जैसी शिकायतों के साथ पहुँच रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए तो वायरल संक्रमण पूरे परिवार को अपनी चपेट में ले सकता है।

आखिर क्यों बढ़ जाते हैं वायरल बुखार के मामले?

मानसून के मौसम में वातावरण में नमी (Humidity) बढ़ जाती है। यह नमी कई प्रकार के वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। इसके अलावा बरसात के कारण जगह-जगह पानी भर जाता है, गंदगी बढ़ती है और लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) भी कई बार कमजोर हो जाती है। यही कारण है कि वायरल संक्रमण तेजी से फैलने लगता है।

स्कूल, कॉलेज, कार्यालय, सार्वजनिक परिवहन और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से वायरस आसानी से दूसरे लोगों तक पहुँच जाता है।

वायरल बुखार क्या है?

वायरल बुखार किसी एक बीमारी का नाम नहीं बल्कि वायरस से होने वाले संक्रमण का सामान्य लक्षण है। विभिन्न प्रकार के वायरस शरीर में प्रवेश करके बुखार, कमजोरी और अन्य लक्षण पैदा करते हैं।

सामान्यतः वायरल बुखार 3 से 7 दिनों तक रहता है, लेकिन कुछ मामलों में यह अधिक गंभीर भी हो सकता है।

फ्लू (इन्फ्लुएंजा) क्या है?

फ्लू एक संक्रामक श्वसन रोग है जो इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होता है। यह संक्रमित व्यक्ति के छींकने, खांसने या उसके संपर्क में आने से तेजी से फैलता है।

यदि समय पर इलाज न किया जाए तो फ्लू निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का रूप भी ले सकता है, विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं में।

वायरल बुखार और फ्लू के प्रमुख लक्षण

इन बीमारियों में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

  • तेज बुखार

  • लगातार सिरदर्द

  • शरीर और मांसपेशियों में दर्द

  • गले में खराश

  • खांसी

  • नाक बहना

  • छींक आना

  • अत्यधिक थकान

  • भूख कम लगना

  • कमजोरी

  • कुछ मरीजों में उल्टी या दस्त

यदि तेज बुखार लगातार बना रहे या सांस लेने में तकलीफ होने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

किन लोगों को अधिक खतरा है?

हालाँकि वायरल संक्रमण किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसकी गंभीरता अधिक हो सकती है—

  • पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चे

  • 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग

  • गर्भवती महिलाएँ

  • मधुमेह, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोग

  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीज

इन लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

कैसे फैलता है संक्रमण?

वायरल बुखार और फ्लू मुख्य रूप से निम्न तरीकों से फैलते हैं—

  • संक्रमित व्यक्ति की छींक या खांसी से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से।

  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से।

  • संक्रमित सतह को छूने के बाद बिना हाथ धोए आँख, नाक या मुँह छूने से।

  • भीड़-भाड़ वाले स्थानों में लंबे समय तक रहने से।

बचाव ही सबसे बड़ा उपचार

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि वायरल संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका सावधानी बरतना है।

1. हाथों की सफाई रखें

दिन में कई बार साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएँ। यदि साबुन उपलब्ध न हो तो अल्कोहल आधारित सैनिटाइज़र का उपयोग करें।

2. मास्क का उपयोग करें

यदि आसपास कोई व्यक्ति बीमार है या आप भीड़-भाड़ वाली जगह पर जा रहे हैं तो मास्क पहनना संक्रमण से बचाव में मदद कर सकता है।

3. भीड़ से बचें

जहाँ तक संभव हो, अत्यधिक भीड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें, विशेषकर यदि आपके आसपास वायरल संक्रमण फैल रहा हो।

4. पर्याप्त पानी पिएँ

शरीर में पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहें।

5. संतुलित आहार लें

हरी सब्जियाँ, मौसमी फल, दालें, दूध, दही और प्रोटीन युक्त भोजन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं।

6. पर्याप्त नींद लें

प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद शरीर को संक्रमण से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है।

बीमारी होने पर क्या करें?

यदि वायरल बुखार या फ्लू के लक्षण दिखाई दें तो—

  • तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

  • स्वयं एंटीबायोटिक दवा न लें, क्योंकि वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक हमेशा प्रभावी नहीं होती।

  • पर्याप्त आराम करें।

  • अधिक मात्रा में तरल पदार्थ लें।

  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का ही सेवन करें।

  • दूसरों से दूरी बनाए रखें ताकि संक्रमण न फैले।

कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?

यदि मरीज में निम्न लक्षण दिखाई दें तो देर नहीं करनी चाहिए—

  • सांस लेने में कठिनाई

  • लगातार 103°F या उससे अधिक बुखार

  • बेहोशी या भ्रम की स्थिति

  • सीने में दर्द

  • बार-बार उल्टी

  • बच्चों में लगातार सुस्ती या दूध न पीना

ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल जाना आवश्यक है।

क्या हर बुखार वायरल होता है?

नहीं। हर बुखार वायरल नहीं होता। डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, चिकनगुनिया और कई अन्य बीमारियों में भी बुखार आता है। इसलिए केवल लक्षण देखकर बीमारी का अनुमान नहीं लगाना चाहिए। यदि बुखार दो-तीन दिन से अधिक बना रहे तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार आवश्यक जाँच करानी चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे मौसम बदलने के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, हाथों की सफाई बनाए रखें, पौष्टिक भोजन करें और किसी भी प्रकार के संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर उपचार से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।

मानसून का मौसम आनंद के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ भी लेकर आता है। वायरल बुखार और फ्लू जैसी बीमारियाँ तेजी से फैल सकती हैं, लेकिन सही जानकारी, व्यक्तिगत स्वच्छता, संतुलित आहार, पर्याप्त आराम और समय पर चिकित्सकीय सलाह अपनाकर इनसे बचाव संभव है। यदि हम छोटी-छोटी सावधानियाँ अपनाएँ और बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें, तो अपने परिवार और समाज दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी संपत्ति है, इसलिए इस मानसून सतर्क रहें, स्वस्थ रहें और दूसरों को भी जागरूक करें।

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